- "खुद ही को कर बुलंद इतना कि हर तदबीर से पहले,
- खुदा खुद बंदे से पूछे बता तेरी रजा क्या है ||"
- अगर आप एक शिक्षक हैं या संस्था प्रधान हैं तो प्रवेश उत्सव आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण आयोजन है। क्योंकि यह पहला आयोजन होगा जिससे हम अपने नवीन शिक्षा सत्र का शुभारंभ करने जा रहे हैं। इसे महज कागजी ना बनाकर थोड़ी सी मेहनत और हौसले के साथ आयोजित कर लें तो विद्यालय की तरफ से समाज में एक बहुत अच्छा मैसेज जा सकता है कहा भी जाता है-
- Well begun is half done
- तो आइए हम जाने कि प्रवेश उत्सव का बेहतर आयोजन कैसे हो। हालांकि प्रवेश उत्सव करीब महीने भर चलने वाली एक प्रक्रिया है परंतु एक भव्य आयोजन के लिए सबसे पहले हमें एक दिन निर्धारित करना है जिस दिन हम इस आयोजन को सर्वश्रेष्ठ रूप देने वाले हैं। यह दिन प्रवेशोत्सव की अंतिम तिथि से कुछ पहले हो तो बेहतर रहेगा। दिन तय होने के बाद आप विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों, विद्यालय के आस पड़ोस या गांव के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, अभिभावकों आदि को निमंत्रित करें। मल्टीमीडिया जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, टि्वटर आदि के द्वारा इस दिन का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करें। जो भी ग्रामीण अथवा अभिभावक मिले उससे इस दिन के बारे में उत्साह के साथ बात करें।कुल मिलाकर एक ऐसा माहौल पैदा करने की कोशिश करें कि लोगों को खुद ब खुद इस दिन का इंतजार हो जाए।
- कार्यक्रम से पहले अपनी तैयारियां पूरी रखें जैसे नवीन प्रवेशी विद्यार्थियों की सूची, फूल मालाएं, पूजन सामग्री, पाठ्य पुस्तकें, स्लेट पेंसिल आदि शिक्षण सामग्री। कार्यक्रम के दिन शिरकत करने वाले लोगों की संख्या के अनुमान के मुताबिक टेंट, हॉल या बरामदे में बैठक व्यवस्था निर्धारित करें।
- कार्यक्रम के शुभारंभ से पूर्व गणमान्य अतिथियों को मुख्य अतिथि आदि के रूप में मंच पर बिठाएं तथा नव प्रवेशी विद्यार्थियों को मंच के पीछे अथवा एक तरफ स्टूल आदि पर बिठाए। कार्यक्रम को दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना, स्वागत गीत आदि के माध्यम से भव्यता की ओर ले जाएं। तत्पश्चात विद्यालय की छात्राओं अथवा महिला शिक्षिका से नव प्रवेशी विद्यार्थियों का तिलकार्चन करवाएं। अतिथियों से एक-एक कर नव प्रवेशियों का माल्यार्पण करवाएं। फिर सभी नव प्रवेशी वीणा पानी मां शारदे का आशीर्वाद लें। अतिथियों के द्वारा उन्हें पाठ्य पुस्तकें/स्लेट/पेंसिल शिक्षण सामग्री का वितरण करवाएं।
- इसके पश्चात विद्यारंभ संस्कार के रूप में प्रत्येक शिक्षक मंच पर आकर एक एक नव प्रवेशी विद्यार्थी को स्तरानुरूप अक्षर ज्ञान आरंभ करवाएं।संस्था प्रधान/ शिक्षक/ अतिथि अपना उद्बोधन और आशीर्वाद दें। मंच संचालक बीच-बीच में शिक्षा के महत्व और प्राचीन भारतीय विद्यारंभ के संस्कार का बखान करता रहे।
- अंत में सभी आगंतुक मेहमानों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम का समापन करें तथा अपनी व्यवस्थाओं के अनुरूप आगंतुक मेहमानों को जलपान आदि करवा कर विदा करें।
- साथियों। अब एक बार आप स्वयं सोचिए कि अगर इस प्रकार का भव्य आयोजन आपके विद्यालय में किया जाता है तो समाज में विद्यालय की ओर से कितना अच्छा संदेश जाएगा तथा ये नन्हे मुन्ने बालक इस मधुर स्मृति को चिरकाल तक अपने हृदय में संजो कर रखेंगे।
- "वक्त बीत जाएगा,,,,, सिर्फ यादें रहेंगी।।" ✍ सांवर चौधरी
अब क्या मायने रखता है कि असल में कौन कैसा है। तुमने जिसके लिए जो सोच बना ली वो बस,वैसा है।। एक बार की बात है। हमारे साल्ट लेक डीडवाना में प्रादेशिक चींटी सम्मेलन का आयोजन हुआ। राजस्थान के कोने कोने से चींटियों के दल डीडवाना पधारे। डीडवाना की चींटियों ने उनकी खूब आवभगत की और उन्हें खाने में नमक परोसा। क्योंकि डीडवाना की चींटियां नमक की झील में रहने के कारण नमक ही खाती हैं और उन्हें लगता है कि इस से स्वादिष्ट भोजन कुछ हो भी नहीं सकता । आगन्तुक चींटियों ने मेजबान चींटियों द्वारा की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए उनके भोजन को भी अच्छा और स्वादिष्ट बताया। अगली बार का आयोजन गंगानगर शुगर मिल के पास रखा गया। सो राजस्थान के कोने कोने से चीटियों के दल गंगानगर शुगर मिल के लिए रवाना हुए। डीडवाना का दल जब गंगानगर के लिए प्रस्थान करने लगा तो एक बुजुर्ग चिंटे ने कहा कि हमें रास्ते में खाने के लिए भोजन साथ ले चलना चाहिए। उनके पास तो भोजन के नाम पर वही नमक के टुकड़े थे। अब चीटियों के पास भोजन ले जाने के लिए कोई टिफिन बॉक्स तो होते नहीं ह...
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